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 वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ईशान कोण कहते हैं। 


वास्तु शास्त्र में इस स्थान को सबसे पवित्र माना गया है। भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है। भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है।


इस दिशा के स्वामी ग्रह बृहस्पति और केतु माने गए है। घर का ये हिस्सा सबसे पवित्र होता है इसलिए ईशान में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि इस दिशा को सबसे शुभ माना गया है।

इसे साफ-स्वच्छ और खाली रखा जाना चाहिए। लेकिन क्या आप ये जानते है कि आपकी नौकरी और बिजनेस की तरक्की ये दिशा ही तय करती है


ईशान कोण में न रखने वाले सामान:


ईशान कोण में कोई नुकीली चीज तथा झाडू भी नहीं रखना चाहिए वरना धन हानि होती है।

घर या ऑफिस के इस हिस्से में बैठक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

इस स्थान पर कूड़ा-कचरा नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर नौकरी-पेशे में रूकावट आती है।

ईशान कोण में स्टोररुम और टॉयलेट नहीं होना चाहिए। इससे कार्यों में रूकावट आती है।

किचन और बेडरुम इस दिशा में होने से वास्तुदोष बनता है।

लोहे का कोई भारी भी इस दिशा में नहीं होना चाहिए।

सिंक या वॉशबेसिन भी इस दिशा में नहीं होनी चाहिए।


ऐसा ईशान कोण खोलता है किस्मत के दरवाजे


इस दिशा में पूजा स्थल बनाएं और वहां लक्ष्मी जी की मूर्ति रखें।

ईशान कोण में श्वेतार्क गणपति रखने से धन लाभ और तरक्की मिलती है।

निवास या कार्यालय के ईशान कोण में देवी-देवताओं की तस्वीर लगाकर रोज पूजा करें।

इस हिस्से की नियमित सफाई भी करवाते रहें क्योंकि घर का ये हिस्सा साफ रहेगा तो वहां मां लक्ष्मी का स्थाई वास होगा।

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